एक शब्द की कविता
एक शब्द की कविता
तुम।

एक शब्द में पृथ्वी सारी
तुम।
एक शब्द में सृष्टि सारी
तुम।

क्या रिश्ता होगा जब तुम ही हो
यह वाणी तेरी
- तुम

काव्यालय को प्राप्त: 10 Jun 2017. काव्यालय पर प्रकाशित: 27 Sep 2019

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इस महीने :

'काव्यालय के आँकड़े - जुलाई 2019 से जून 2020'


काव्यालय की गतिविधि का वार्षिक रिपोर्ट, जुलाई 2019 से जून 2020 का संक्षिप्त ब्यौरा इस प्रकार है ..

पूरी प्रस्तुति यहाँ पढें और सुनें...
बेकली महसूस हो तो गुनगुना कर देखिये।
दर्द जब हद से बढ़े तब मुस्कुरा कर देखिये।

रोशनी आने को एक दिन खुद-ब-खुद आ जायेगी
आज तो तारीक़ियों को ही जला कर देखिये।

~ विनोद तिवारी


संकलन "समर्पित सत्य समर्पित स्वप्न" से
अब मुद्रित (प्रिंटेड) संस्करण भी उपलब्ध

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