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ऋतु शर्मा नन्नन पाँडे
ऋतु शर्मा नन्नन पाँडे की काव्यालय पर रचनाएँ
मौन के शब्द

भारत की मिट्टी में जन्मी, सूरीनाम की बहू और नीदरलैंड की निवासी डॉ. ऋतु शर्मा नन्नन पाँडे हिन्दी भाषा, साहित्य, पत्रकारिता और सांस्कृतिक संवाद का एक सशक्त नाम हैं। वे लेखिका, पत्रकार, समीक्षक, संपादक, अनुवादिका (हिन्दी-डच / डच-हिन्दी), मंच संचालिका और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय हैं।

दिल्ली दूरदर्शन के साहित्यिक कार्यक्रम “साहित्यिकी”, विशेष श्रृंखला “बीसवीं शताब्दी की कालजयी कृतियाँ” तथा “पत्रिका” से जुड़कर उन्होंने साहित्यिक पत्रकारिता को नई दिशा दी। वे आकाशवाणी दिल्ली के विदेश प्रसारण विभाग में समाचार वाचिका रहीं तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के खालसा कॉलेज में पत्रकारिता एवं जनसंचार की प्रवक्ता के रूप में भी कार्यरत रहीं।

नीदरलैंड में रहते हुए पिछले दो से अधिक दशकों से वे हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार, सूरीनाम व नीदरलैंड के लिए हिन्दी शिक्षण, प्रवासी साहित्य और महिला सशक्तिकरण के लिए सतत कार्य कर रही हैं।

विश्व हिन्दी सचिवालय मॉरीशस के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित मासिक कार्यक्रम “हिन्दी में अभिव्यक्ति” और “साहित्य में अभिव्यक्ति” की सह-संयोजिका एवं संचालिका व उनके अपने फ़ेसबुक पेज के साप्ताहिक कार्यक्रम “ लेखक की कहानी-लेखक की ज़ुबानी “ द्वारा वे विश्वभर के साहित्यकारों को जोड़ रही हैं।

डॉ. ऋतु शर्मा का साहित्यिक संसार बहुआयामी है। उनका नाटक “पुस्तक की आत्महत्या” विश्व हिन्दी सचिवालय मॉरीशस की अंतरराष्ट्रीय हिन्दी नाटक लेखन प्रतियोगिता 2025 में यूरोप का प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर चुका है।

बाल साहित्य, लोककथाएँ, कविता, प्रवासी विमर्श और सांस्कृतिक संवाद पर उनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हैं, जिनमें — उद्भ्रांत की साहित्य साधना एक विमर्श “नीदरलैंड की लोक कथाएँ”, “नीदरलैंड की चर्चित कहानियाँ”, “ट्यूलिपों के देश नीदरलैंड की जादुई कहानियाँ”, “संदूकची भावों की”, बाल उपन्यास “जानवरों का जानी दुश्मन “ तथा हिन्दी-डच द्विभाषीय पुस्तकें स्वतंत्रता दिवस ( बाल पुस्तक) पंचतंत्र की श्रेष्ठ कहानियाँ ( हिन्दी-डच) विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं।

उनके लेख, शोधपत्र और रचनाएँ भारत, सरकार की पत्र पत्रिकाओं, सूरीनाम, मॉरिशस कनाडा, जापान, ब्रिटेन और अन्य देशों की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती रही हैं। सूरीनाम और नीदरलैंड में हिन्दी के विकास , श्री राम से सूरीनाम, ( गिरमिटिया संस्कृति)पर उनका शोधकार्य प्रवासी हिन्दी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

साहित्य और समाज सेवा के क्षेत्र में उन्हें अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से अलंकृत किया गया है, जिनमें — विश्व हिन्दी सचिवालय मॉरीशस का प्रवासी साहित्यकार सम्मान, भारत सरकार का हिन्दी भाषा सम्मान,प्रथम यूरोप हिन्दी सम्मेलन रोमानिया द्वारा-विशेष सम्मान भारतीय सहयोग परिषद भारत सरकार द्वारा प्रवासी सम्मान नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा विशेष हिन्दी सेवी पुरस्कार अमृता प्रीतम काव्य सम्मान, साहित्य रत्न सम्मान, प्रेमचंद साहित्य सम्मान, और नीदरलैंड में समाजसेवा हेतु विशेष सम्मान प्रमुख हैं।


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