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अशोक चक्रधर
अशोक चक्रधर की काव्यालय पर रचनाएँ
कोयल का सितार

"पद्मश्री, हास्य रत्न, साहित्य शिरोमणि, हिंदी-रत्न, विद्याभूषण, दिल्ली रत्न, ब्रज गौरव, ब्रज-विभूति, यश भारती, आदि, अनादि, अनंत!!" -- यह है अशोक चक्रधर को प्राप्त पुरस्कारों की सूची! :-) (उनके फ़ेसबुक पेज से)

हास्य-व्यंग्य और कविता की वाचिक परंपरा के प्रमुख विद्वानों में से एक, प्रौढ़ एवं नवसाक्षरों के लिए विपुल लेखक, नाटककार, अनुवादवादक, टेलीफ़िल्म, वृत्तचित्र, धारावाहिक लेखक, निर्देशक, अभिनेता, नाटककर्मी, कलाकार तथा मीडिया कर्मी के रूप में निरंतर कार्यरत रहने के अलावा अशोक चक्रधर ने कंप्यूटर में हिंदी के प्रयोग को लेकर भी महत्वपूर्ण काम किया है।

जन्म खुर्जा उत्तर प्रदेश में। पिताजी डॉ॰ राधेश्याम 'प्रगल्भ' अध्यापक, कवि, बाल साहित्यकार और संपादक थे। बचपन से ही उन्हें अपने कवि पिता का साहित्यिक मार्गदर्शन मिला। सन 1962 में, ग्यारह वर्ष की आयु में सोहन लाल द्विवेदी की अध्यक्षता में अपने पिता द्वारा आयोजित एक कवि सम्मेलन में अशोक चक्रधर ने अपने मंचीय जीवन की पहली कविता पढ़ी।

1972 में उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय में एम. लिट्. में प्रवेश लिया। इसी बीच उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज में प्राध्यापक पद पर नियुक्ति मिल गई। 1975 में उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हिंदी व पत्रकारिता विभाग में प्राध्यापक के पद पर कार्य प्रारंभ किया, जहाँ वे 2008 तक कार्यरत रहे। प्रोफेसर के पद से सेवा निवृत्त होने के बाद संप्रति केन्द्रीय हिंदी संस्थान तथा हिन्दी अकादमी, दिल्ली के उपाध्यक्ष पद पर कार्यरत हैं।

"चौं रे चम्पू" लघु लेखों के द्वार व अपने अनुभव अति मनोरंजक व सकारात्मक रूप से अपने फ़ेसबुक पेज पर साझा करते रहते हैं।

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