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नीशू बाल्यान
नीशू बाल्यान की काव्यालय पर रचनाएँ
आना

नीशू बाल्यान हरयाणा, गुरुग्राम में रहती हैं। बचपन में गुजरात में पढ़ाई करने का मौका मिला, वहीं गुजराती सीखी। ऐसे वह ज्यादातर हिन्दी में ही लिखती हैं, पर विभिन्न लोक भाषाओं का रस अपनी रचनाओं में घोलने में माहिर हैं। उनकी सृजन यात्रा के विषय में, उनके अपने शब्दों में -

बहुत छोटी थी,तब बहुत शरारती थी लेकिन प्रतिभाशाली भी कहा करते थे सब...एसे में पापा ने कक्षा 4 के दौरान समझाया...लिखने के बारे में।उस समय जो समझ आया..उसके आधार पर..7-8 पंक्तियों की एक कविता लिखी थी...दहेज़-प्रथा।
फिर छात्रावास के अपने विचित्र अनुभवों को यदा-कदा लिख लेती थी।
उसके बाद फिर दीर्घ विराम...।शादी के बाद एक -दौ कविताएं लिखी। लेकिन एम्.एड.के दौरान विभन्न अवसरों में आयोजन हेतु कविताएं लिखी..लगभग 8 या 10...उनके लिए मेरी वहां सदाबहार पहचान बन गई...कॉलेजेज़ के समूह में भी जब मैं मंच पर प्रस्तुति देती थी...तो अनापेक्षित स्वीकृति और सम्मान की भागी बनी।यहां तक की डीन, रजिस्ट्रार,और बड़े बड़े लोगों से लेकर विद्यार्थियों तक सब मुझे बेहद सम्मान दिया करते हैं ..आज भी।
वहीं पर कॉलेजे बुक में मेरी एक कविता प्रकाशित हुई।
हाल ही में फ़ेसबुक के कविता ग्रुप से सम्मिलित होकर लिखने की बाँध टूटी।
काव्य जगत की वर्तमान वास्तविकता को देख और समझते हुए विरक्ति का अनुभव होता है। कविताएं मेरे लिए आमदनी का ज़रिया नहीं हैं...शायद इसलिए ही।

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