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हमारा परिचय



वाणी मुरारका और विनोद तिवारी काव्यालय का सम्पादन और संचालन करते हैं|

वाणी मुरारका एक सॉफ्टवेयर निर्माता हैं और थोड़ी थोड़ी कवि भी हैं|
विनोद तिवारी भौतिक वैज्ञानिक हैं जो कविता भी लिखते हैं - या यह समझ लें कि कवि हैं जो वैज्ञानिक भी हैं|

हम दोनों का हिन्दी ज्ञान तो सीमित है किन्तु हिन्दी कविता में रूचि असीमित। काव्यालय हमारा अपना संग्रह है, उन कविताओं का जो हमें पसंद है और जो हम विश्व के साथ बाँटना चाहते हैं| यह मुख्य रूप से हिन्दी काव्य के प्रति हमारे प्रेम की अभिव्यक्ति है|

आपको आमंत्रण है कि आपके काव्यालय से सम्बंधित कोई सुझाव हों तो हमें ज़रूर लिखें| आपको अगर कोई रचना प्रिय हो जो आप काव्यालय के संग बाँटना चाहें, तो बताएँ|


काव्यालय की अबतक की यात्रा

काव्यालय का आरम्भ 1997 में हुआ था जब इंटरनेट भारत में जन सामान्य के लिए उपलब्ध होना बस शूरु ही हुआ था| विश्व में और जगहों पर भी विश्वविद्यालयों के बाहर के बाहर इंटरनेट का प्रयोग प्रारम्भिक स्तर पर ही था|

ऐसे में इंटरनेट पर काव्यालय विश्व का पहला काव्यसंकलन था और वह पहला काव्य सम्बंधित वेबसाइट था जहाँ हिन्दी देवनागरी में लिखी गई थी| वाणी का अपने आपको वेबसाइट बनाना सिखाने के प्रयास में काव्यालय का जन्म हुआ|

डॉ. विनोद तिवारी जून 2001 में काव्यालय के सह-सम्पादक बने| काव्यालय का वर्तमान रूप वाणी मुरारका और विनोद तिवारी के संयुक्त योगदान का परिणाम है|

यहाँ रचनाएँ प्राचीन, समकालीन, और उभरते कवियों के विभागों में संकलित हैं| अन्य भाषाओं की अनुदित रचनाएँ भी उपलब्ध हैं| काव्यालय में कविताओं के चयन में हम लोग अत्यधिक सतर्क रहते हैं। काव्य के प्रत्येक पहलू पर हम लोग बहुत गम्भीरता से विचार करते हैं। जब हम दोनों सम्पादक किसी कविता से पूर्ण रूप से संतुष्ट होते हैं, तभी उस कविता को काव्यालय में प्रकाशन के लिए स्वीकार किया जाता है। इसी तरह से हम लोग काव्यालय में प्रकाशित कविताओं का स्तर ऊंचा लखने में सफल हो सके हैं|

काव्यालय की विशेष प्रस्तुतियाँ हैं: प्रतिध्वनि और काव्य लेख| प्रतिध्वनि, कविताओं का ऑडियो, का आरम्भ 2012 में हुआ| यह विशेषरूप से उनके लिए जो किसी कारणवश हिन्दी नहीं पढ़ सकते हैं| इसके अतिरिक्त ऑडियो द्वारा हर किसी को अपने मोबाइल या कंप्यूटर पर किसी भी समय एक कवि गोष्ठी में होने का सा आनंद प्राप्त हो सकता है|

काव्य लेख में काव्य विधा सम्बंधित लेख हैं| काव्य शिल्प से सम्बंधित ज्ञान आजकल जन साधारण को आसानी से मिलती नहीं है| इस रिक्तता हो भरने का यह हमारा छोटा सा प्रयास है|

काव्य-शिल्प सम्बंधित सॉफ्टवेयर "गीत गतिरूप" का जन्म भी काव्यालय से ही हुआ| कवि इसका प्रयोग कर अपनी रचनाओं को और तराश सकते हैं|

प्राराम्भ से ही काव्यालय को हिन्दी प्रेमियों की प्रशंसा मिलती रही है| इसका सारा श्रेय उन कवियों को जाता है जिनकी रचनाओं से काव्यालय सुशोभित है|


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