परमाणू ऊर्जा
अति सूक्ष्म परमाणु
असीमित उर्जा भंडार
साध इनकी शक्ति
सृजनात्मकता अपार!

कलुषित मन विचार
दे रूप इसे विकराल,
यह वो ब्रह्मास्त्र है -
जिससे धरा बने पाताल!

परमाणुओं का यह महादैत्य
कल्पित नहीं यथार्थ है,
यदि बोतल से निकला
सृष्टि का विनाश है!

हिरोशिमा तो अल्पांश था
परमाणु शक्ति विध्वंस का,
परमाणु अस्त्रागार है -
सौ सौ धरा के नाश का!

संभल मानव
अभी समय है,
विध्वंस तांडव से पूर्व
निद्रा अपनी पूर्ण कर ले!

इस अग्नि बीज लो
एकत्र करना बंद कर,
पूर्व इसमें भस्म हो
धरा मानव इतिहास बन ले!
- कवि कुलवंत सिंह
Kavi Kulwant Singh
Email : singhkw@indiatimes.com
Kavi Kulwant Singh
Email : singhkw@indiatimes.com

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इस महीने - काव्यालय की विशेष प्रस्तुति
युद्ध के बाद कृष्ण पर क्या बीत रही होगी - वह सपने में देखती है
तुम्हारे महान बनने में - क्या मेरा कुछ टूट कर बिखर गया है कनु!
कृष्ण द्वारका चले गए हैं - और उनकी प्रिया? उसका संसार?
उस दिन कृष्ण अपनी प्रिया को कितनी देर वंशी से टेरते रहे -