जो तुम तोरौ राम
जो तुम तोरौ राम, मैं नहिं तोरौं,
तुम सो तोरि कवन संग जोरौं॥
तीरथ बरत न करौं अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल को भरोसा॥
जहँ जहँ जावों तुम्हरी पूजा, तुम सा देव और नहिं दूजा॥
मैं अपनो मन हरि सों जोर्यो, हरि सो जारि सवन सों तोर्यो॥
सबहीं पहर तुम्हरी आसा, मन क्रम बचन कहै 'रैदासा'॥
- रैदास

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इस महीने
'अँधेरे का मुसाफ़िर'
सर्वेश्वरदयाल सकसेना


यह सिमटती साँझ,
यह वीरान जंगल का सिरा,
यह बिखरती रात, यह चारों तरफ सहमी धरा;
उस पहाड़ी पर पहुँचकर रोशनी पथरा गयी,
आख़िरी आवाज़ पंखों की किसी के आ गयी ...
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इस महीने
'शून्य कर दो'
विनीत मिश्रा


मुझको फिर से शून्य कर दो
तुम्हारे योग से ही तो पूर्ण हुआ था
फिर भूल गया
मेरा अस्तित्व था नगण्य
तुमसे जुड़े बिन
नए अंकों से मिल कर
मैंने मान लिया था स्वयं को
पूर्ण से भी कुछ अधिक ...
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शुक्रवार 6 जुलाई को

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