Khilaunaa
beech baazaar
khilaune vaale
ke khilaune
kee aavaaz se
aakarShit ho
kadam usakee
taraph baḌhe,
mainne chhuaa,
sahalaayaa unhen
v ek khilaune
ko ank men bharaa
ki peechhe se karkaSh
aavaaz ne mujhe
jhanjhoḌaa
‘‘tumhaaree bachchon kee see
harakaten kab khatm hongee!’’
sunakar meraa nanhaa bachchaa
saham saa gayaa
meree prauḌh deh ke andar.
- Shabnam Sharma
Email: shabnamsharma2006@yahoo.co.in

प्राप्त: 5 Nov 2016. प्रकाशित: 20 Jul 2017

***
इस महीने
'अँधेरे का मुसाफ़िर'
सर्वेश्वरदयाल सकसेना


यह सिमटती साँझ,
यह वीरान जंगल का सिरा,
यह बिखरती रात, यह चारों तरफ सहमी धरा;
उस पहाड़ी पर पहुँचकर रोशनी पथरा गयी,
आख़िरी आवाज़ पंखों की किसी के आ गयी ...
पूरी रचना यहाँ पढें...
इस महीने
'शून्य कर दो'
विनीत मिश्रा


मुझको फिर से शून्य कर दो
तुम्हारे योग से ही तो पूर्ण हुआ था
फिर भूल गया
मेरा अस्तित्व था नगण्य
तुमसे जुड़े बिन
नए अंकों से मिल कर
मैंने मान लिया था स्वयं को
पूर्ण से भी कुछ अधिक ...
पूरी रचना यहाँ पढें...
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