धत्
सीधा
मेरी आँखों में
बेधड़क घूरती
बिल्ली सा
वह एक
निडर ख़्याल तेरा
टाँगों के बीच
पूँछ दबा
मेरी एक धत् से
भाग लिया।
- दिव्या माथुर
Divya Mathur
email: divyamathur@aol.com
Divya Mathur
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दिव्या माथुर
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पेड़ नहीं हैं, उठी हुई
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तेरे मेरे लिए माँगती
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पेड़ नहीं हैं ये धरती की
खुली निगाहें हैं
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तुझे दरिया बुलाते हैं,
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देख यायावर! तू ठहरना नहीं,
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देख यायावर! तू ठहरना नहीं,
जब तलक आँखें अनिमेष ठहर जाए न। ...
पूरी रचना यहाँ पढें...