धत्
सीधा
मेरी आँखों में
बेधड़क घूरती
बिल्ली सा
वह एक
निडर ख़्याल तेरा
टाँगों के बीच
पूँछ दबा
मेरी एक धत् से
भाग लिया।
- दिव्या माथुर
Divya Mathur
email: divyamathur@aol.com
Divya Mathur
email: divyamathur@aol.com

***
दिव्या माथुर
की काव्यालय पर अन्य रचनाएँ

 धत्
 एक बौनी बूँद
 नृत्य
इस महीने
'समय की शिला पर'
शम्भुनाथ सिंह


समय की शिला पर मधुर चित्र कितने
किसी ने बनाये, किसी ने मिटाये।

किसी ने लिखी आँसुओं से कहानी
किसी ने पढ़ा किन्तु दो बूंद पानी
इसी में गये बीत दिन ज़िन्दगी के
गयी घुल जवानी, गयी मिट निशानी।

विकल सिन्धु के साध के मेघ कितने
धरा ने उठाये, गगन ने गिराये।
...
पूरी रचना यहाँ पढें...
अगली प्रस्तुति
शुक्रवार 22 दिसम्बर को

सूचना पाने के लिए
ईमेल दर्ज़ करें