आना

हिन्दी अनुवाद

मैं यहाँ अकेली हो गई...

मैं घड़ी की, घंटे की सुई
और तू सैकण्ड की सुई
समान... रुकता ही नहीं।
दिन का अवसान
अभी बाकी है...
पागल हुई पर,
श्वांसप्राण बाकी है...

लेकिन तू... समझता ही नही!!

आना... राह तकूंगी
अभी महाप्रयाण बाकी है,
तेरे, कंधों की सैर
बाकी है,
इन लरज़ती अँगुलियों की
छुअन बाकी है,
अभी बंज़र धरा में
तूफ़ान बाकी है।
आना, अगली बात बाकी है,
सूखी बगिया में
बहार बाकी है।
जीवन नौका की
पतवार बाकी है।
तेरी और मेरी

बात बाकी है।।

अधूरी वात (गुजराती मूल)

हूँ अत्यारे, एकली थई गई...

हूँ घड़ियाल नी, घंटा नो शूल,
अणे तू सेकंड नो शूल
सम... थमतो ज नथी।।
दिवस नो अवसान
हवे बाकी छे...
घेलि थई पण ,
स्वांस प्राण बाकी छे...

पण तू... हमजे ज नथी।।

आवजो... वाट जोविश
हवे महाप्रयाण बाक़ी छे,
तारी, काँधा नी सेर
वाकी छे,
आ थरथराती अंगुलिओनी
छुवन वाकी छे,
हवे बंज़र धरा मां
तूफ़ान वाकी छे।।
आवजो, आगली वार्ता
वाकी छे, सूखी फुलवारी
नी वहार वाकी छे।
होड़ी मां पतवार
वाकी छे।
तारी अने मारी

वार्ता वाकी छे।।
- नीशू बाल्यान

3rd Feb 2017 को प्रकाशित

***
इस महीने की कविता
'पेड़, मैं और सब'
मरुधर मृदुल


पेड़ नहीं हैं, उठी हुई
धरती की बाहें हैं
तेरे मेरे लिए माँगती
रोज दुआएँ हैं।

पेड़ नहीं हैं ये धरती की
खुली निगाहें हैं
तेरे मेरे लिए निरापद
करती राहे हैं। ...
पूरी रचना यहाँ पढें...
इस महीने की कविता
'देख यायावर!'
सोनू हंस


तुझे दरिया बुलाते हैं,
बूँदों के हार लेकर।
तुझे अडिग पर्वत बुलाते हैं,
हिम कणों का भार लेकर।
देख यायावर! तू ठहरना नहीं,
जब तलक वादियाँ मिल जाए न।
देख यायावर! तू ठहरना नहीं,
जब तलक आँखें अनिमेष ठहर जाए न। ...
पूरी रचना यहाँ पढें...